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दाढ़ी और राहु

दाढ़ी और राहु का सम्बन्ध प्रत्यक्ष नहीं, अपितु सूक्ष्म और आध्यात्मिक है। राहु छाया ग्रह होकर भी व्यक्ति के व्यक्तित्व, आकर्षण और भिन्नता को प्रभावित करता है। जब किसी की कुंडली में राहु प्रबल होता है, तब उसमें सामान्य से अलग दिखने की प्रवृत्ति, रहस्यपूर्ण आभा और एक प्रकार का चुंबकीय प्रभाव देखा जाता है। यही कारण है कि ऐसे व्यक्तियों में दाढ़ी रखने या विशिष्ट शैली अपनाने की प्रवृत्ति अधिक दिखाई देती है। दाढ़ी केवल रूप-सौंदर्य नहीं, अपितु प्राचीन परंपरा में यह तेज, तप और ऊर्जा का प्रतीक मानी गई है। ऋषि-मुनियों, साधकों और तांत्रिकों ने दाढ़ी को केवल शारीरिक स्वरूप नहीं, बल्कि आंतरिक शक्ति के संरक्षण का माध्यम माना। विशेषतः काल भैरव साधना में यह मान्यता है कि दाढ़ी और जटा व्यक्ति के भीतर संचित ऊर्जा को स्थिर रखने में सहायक होती हैं। अब प्रश्न आता है कि व्यक्ति को दाढ़ी कैसी रखनी चाहिए। इसका उत्तर केवल फैशन नहीं, अपितु स्वभाव और ग्रह प्रभाव से जुड़ा है। यदि राहु प्रबल हो तो व्यक्ति को दाढ़ी अत्यधिक अस्त-व्यस्त नहीं रखनी चाहिए, अन्यथा भ्रम, अस्थिरता और मानसिक असंतुलन बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति म...