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मूलांक भाग्यांक

#भाग्यांक (जिसे भाग्यांक, Destiny Number या Life Path Number भी कहा जाता है) वैदिक अंक ज्योतिष में व्यक्ति के जीवन की दिशा, कर्मफल, अवसरों और चुनौतियों का प्रमुख सूचक है। यह पूरी #जन्म_तिथि से निकाला जाता है। #भाग्यांक_निकालने_की_विधि (पूरी जन्म तिथि से): जन्म तिथि के सभी अंकों (दिन, महीना, वर्ष) को अलग-अलग जोड़कर एकल अंक (1 से 9 तक) या #मास्टर_नंबर (11, 22, 33) तक घटाया जाता है।  उदाहरण: यदि जन्म तिथि 15 अगस्त 1990 है, तो 1 + 5 + 0 + 8 + 1 + 9 + 9 + 0 = 33 → 3 + 3 = 6 (भाग्यांक 6)।  यह विधि #वैदिक_परंपरा में ग्रहों की ऊर्जा और खगोलीय गणना से जुड़ी है, जहाँ संख्याएँ ग्रहों की गति (सूर्य सिद्धांत में वर्णित कक्षीय चक्र) से प्रेरित मानी जाती हैं। #सूर्य_सिद्धांत जैसे प्राचीन ग्रंथ में ग्रहों की परिक्रमा और समय विभाजन (घड़ी, मुहूर्त) का आधार संख्यात्मक है, जो अंकों के योग से जीवन चक्र को दर्शाता है। #मूलांक_और_भाग्यांक_में_अंतर: #मूलांक (Mulank / Birth Number / Root Number): यह केवल जन्म तिथि (दिन) के अंकों का योग है। उदाहरण: 15 तारीख → 1 + 5 = 6। यह व्यक्ति के जन्मजात स्वभाव, व्...

चंद्र 6,8,12 भाव मे

🕉️ चंद्रदेव की भावुक अग्निपरीक्षा: भाव ६, ८, और १२ में चंद्रमा का गहन विश्लेषण: चंद्रमा मन, भावनाएँ, माता, और तरलता का प्रतीक है, और त्रिक भाव (६, ८, १२) चुनौतियों, परिवर्तन, और विसर्जन का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन भावों में चंद्रमा का होना व्यक्ति के मानसिक और भावनात्मक जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है। यह विश्लेषण त्रिक भावों में #चंद्रमा की स्थिति के मानसिक स्वास्थ्य, अचानक भावनात्मक परिवर्तन, और अवचेतन मन पर पड़ने वाले वैज्ञानिक, ज्योतिषीय, और मनोवैज्ञानिक प्रभावों पर आधारित है। 🕉️ षष्ठम भाव (शत्रु/रोग/ऋण) में चंद्रमा – "भावनात्मक प्रतिद्वंदिता और चिंता" छठा भाव रोग, शत्रु, ऋण, और सेवा का भाव है। यहाँ चंद्रमा की स्थिति व्यक्ति के मन को निरंतर तनाव और चिंता के माहौल में रखती है, जिससे भावनात्मक स्थिरता बनाए रखना कठिन हो जाता है। 🪔 खगोलीय-वैज्ञानिक रहस्य (Somatization & Neurotic Anxiety): 👉 मूल सिद्धांत: छठा भाव तनाव से संबंधित है। चंद्रमा यहाँ बैठकर चिंता (#Anxiety) और भय जैसी नकारात्मक भावनाओं को शारीरिक लक्षणों में परिवर्तित करने की प्रवृत्ति देता है। इसे आधुनिक मनोव...

क्रूर गृह

मंगल ही नहीं और भी क्रूर ग्रह हैं #वैवाहिक सम्बन्ध खराब करतें हैं।। =================================== आप यह तो अवश्य ही जानते होंगे कि कुण्डली में 1,4,7,8 व 12वें भाव में मंगल के होने अथवा उसकी दृष्टि होने पर वैवाहिक जीवन तहस नहस हो जाता है, परन्तु यह भी जानना आवश्यक है कि शनि, राहु, केतु, सूर्य व गुरु भी अकेले सातवें भाव में मौजूद हों तो वह वैवाहिक सम्बन्ध बिगाड़ देते हैं ! यही नहीं शनि यदि लग्न में, पाँचवे भाव में, आठवें भाव, दसवें भाव में भी मौजूद हों तो भी वह वैवाहिक जीवन खराब करते हैं, यही नहीं विवाह में बाधा डाल कर विवाह में विलम्ब भी कराते हैं  शनि की दृष्टि यदि सप्तमेश पर पड़ रही हो तब भी विवाह में अड़चन आयेगी व शादी विलम्ब से होगी ! यदि कुण्डली कन्या की है और शनि की दृष्टि कन्याओं के विवाह के कारक ग्रह वृहस्पति पर हो तब भी उसका विवाह विलम्ब से होगा, वहीं वर की कुण्डली में उसके विवाह के कारक ग्रह शुक्र पर यदि शनि की दृष्टि होगी तब भी विवाह विलम्ब से होगा ! शनि की सातवी दृष्टि के अलावा तीसरी व दशवीं दृष्टि भी मानी गयी है इनमें से सभी दृष्टि कुप्रभाव ही देती हैं ! परन्तु इसका ...

vastu 5 elements

🏠🌿 Five Elements, One Home – The Science Behind Vastu 🌿🏠 Every house is not just made of bricks and concrete. It is made of five natural elements—and when they are placed in harmony, life flows smoothly. The image explains an important Vastu truth 👇 🌍 Earth (South-West) Represents stability, support, and strength. A strong South-West gives career stability, mental balance, and long-term growth. 🔥 Fire (South-East) Symbol of energy and transformation. That is why kitchen and electrical activities belong here—not in other zones. 🌊 Water (North-East) Stands for clarity, health, and prosperity. Clean, open, and light North-East supports peace and positive thinking. 🌬️ Air (North-West) Controls movement, communication, and change. Proper ventilation here improves relationships and work flow. ✨ Space (Centre – Brahmasthan) The heart of the house. Keeping it open allows energy to circulate freely across all directions. 🔑 Simple Vastu lesson: When elements are respected, life feels b...

ज्योतिष में शुक्र ग्रह

ज्योतिष में शुक्र ग्रह शुक्र को दैत्य गुरु “शुकराचार्य” कहा गया है। यह वह दिव्य ऋषि हैं जिन्हें मृत-संजीवनी विद्या का वरदान प्राप्त था – अर्थात मृत प्राणियों में पुनः जीवन डालने की कला। यही कारण है कि कुंडली में शुक्र व्यक्ति को टूटने नहीं देता, चाहे जीवन कितना भी कठिन क्यों न हो। शुक्र लक्ष्मी, सौंदर्य, वैभव, भोग, विलासिता, प्रेम, कला, संगीत, वस्त्र, सुगंध, रत्न, आकर्षण, वाहन, और विवाह सुख का कारक है। जिस कुंडली में शुक्र शुभ हो, वहाँ गरीबी लंबे समय तक टिक नहीं पाती। अब देखें – 12 भावों में शुक्र का सामान्य फल 1st भाव (लग्न में शुक्र) व्यक्ति आकर्षक व्यक्तित्व वाला, सुंदर मुख-मंडल, कला प्रेमी, अच्छे कपड़े और सुगंध का शौकीन। समाज में सम्मान और लोकप्रियता मिलती है। जीवन में प्रेम और सफलता सहज मिलती है। 2nd भाव वाणी में मिठास, परिवार में धन-वैभव, अच्छे भोजन और गहनों का सुख। बैंक बैलेंस अच्छा, व्यापार में लाभ और वाणी से काम निकलवाने की क्षमता। 3rd भाव साहसी, रचनात्मक, संगीत–नृत्य–कला में उत्कृष्ट। छोटे भाई-बहनों से प्रेम। सोशल मीडिया, प्रदर्शन कला, लेखन या विज्ञापन में सफलता। 4th भाव मां ...

इस कलयुग में जिसका राहु बिगड़ा होता है उस इंसान का सबसे पहले अपनी औलाद से संबंध

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इस कलयुग में जिसका राहु बिगड़ा होता है उस इंसान का सबसे पहले अपनी औलाद से संबंध बिगड़ जाता है या उसकी औलाद ही बिगड़ जाती है 💫उसके द्वारा बच्चों को दी गई अच्छी शिक्षा,संस्कार,ज्ञान सब धरा रह जाता है जब राहु की खराब ऊर्जाएं जन्म पत्री में एक्टिव हो कर घर परिवार की जिंदगी में घुस जाती है। बच्चे माता पिता के शत्रु बनते है या माता पिता बच्चों के शत्रु बनते है जब राहु बिगड़ता है। जिनका राहु अच्छा होगा उस इंसान के बच्चे आज्ञाकारी और संस्कारी होंगे, अपने जीवन में सफल और कामयाब होंगे। राहु इंसान को करोड़पति बनाता है और खराब होने पर रोडपति बना देता है। राहु पीछे लग जाता है तो इंसान का हर फैसला गलत और उल्टा पड़ता है,वह जो भी काम करता है पुरु नहीं होता है, काम कारोबार में नफे की जगह तेजी से नुकसान होने लगता है और कर्ज स्पीड से बढ़ जाता है, इंसान को सोचने समझने का टाइम भी नहीं मिलता है और उसकी हंसती खेलती दुनिया उलट पलट जाती है,ऐसों आराम से जिंदगी जीने वाले लोग राहु की वजह से दर दर की ठोकर खाने को मजबूत हो जाते है। गाड़ी बंगला,दुकान मकान,बाप दादाओं की प्राप्तियां आदि सब बिकवा देता है र...

व्यापार वृद्धि यंत्र (Vyapar Vriddhi Yantra) की विस्तृत जानकारी

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📈 व्यापार वृद्धि यंत्र (Vyapar Vriddhi Yantra) की विस्तृत जानकारी 🕉️ व्यापार वृद्धि यंत्र विशेष रूप से व्यवसाय, व्यापार और करियर में सफलता, विस्तार और लाभ सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह यंत्र देवी लक्ष्मी, बुध (जो व्यापार के देवता हैं), और गणेश (जो विघ्नहर्ता हैं) की संयुक्त शक्तियों को समाहित करता है। यह यंत्र व्यापार में आने वाली बाधाओं, वित्तीय जोखिमों और प्रतिस्पर्धा को कम करने में सहायक होता है। इसकी साधना से व्यवसाय में स्थिरता, उन्नति और अखंड धन लाभ प्राप्त होता है। यह यंत्र विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जो नया व्यवसाय शुरू कर रहे हैं या पुराने व्यवसाय में मंदी का सामना कर रहे हैं। 🕉️ निर्माण विधि (Nirman Vidhi) व्यापार वृद्धि यंत्र एक ज्यामितीय आरेख है जिसमें विशिष्ट अंक, बीज मंत्र और चक्र शामिल होते हैं, जो धन, बुद्धि और सफलता के तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस यंत्र में अक्सर श्री यंत्र और कुबेर यंत्र के कुछ हिस्सों का मिश्रण देखने को मिलता है, क्योंकि यह धन के आगमन और स्थायित्व दोनों पर केंद्रित होता है। इसे मुख्य रूप से ताँबा या पं...