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Showing posts from December, 2025

क्रूर गृह

मंगल ही नहीं और भी क्रूर ग्रह हैं #वैवाहिक सम्बन्ध खराब करतें हैं।। =================================== आप यह तो अवश्य ही जानते होंगे कि कुण्डली में 1,4,7,8 व 12वें भाव में मंगल के होने अथवा उसकी दृष्टि होने पर वैवाहिक जीवन तहस नहस हो जाता है, परन्तु यह भी जानना आवश्यक है कि शनि, राहु, केतु, सूर्य व गुरु भी अकेले सातवें भाव में मौजूद हों तो वह वैवाहिक सम्बन्ध बिगाड़ देते हैं ! यही नहीं शनि यदि लग्न में, पाँचवे भाव में, आठवें भाव, दसवें भाव में भी मौजूद हों तो भी वह वैवाहिक जीवन खराब करते हैं, यही नहीं विवाह में बाधा डाल कर विवाह में विलम्ब भी कराते हैं  शनि की दृष्टि यदि सप्तमेश पर पड़ रही हो तब भी विवाह में अड़चन आयेगी व शादी विलम्ब से होगी ! यदि कुण्डली कन्या की है और शनि की दृष्टि कन्याओं के विवाह के कारक ग्रह वृहस्पति पर हो तब भी उसका विवाह विलम्ब से होगा, वहीं वर की कुण्डली में उसके विवाह के कारक ग्रह शुक्र पर यदि शनि की दृष्टि होगी तब भी विवाह विलम्ब से होगा ! शनि की सातवी दृष्टि के अलावा तीसरी व दशवीं दृष्टि भी मानी गयी है इनमें से सभी दृष्टि कुप्रभाव ही देती हैं ! परन्तु इसका ...

vastu 5 elements

🏠🌿 Five Elements, One Home – The Science Behind Vastu 🌿🏠 Every house is not just made of bricks and concrete. It is made of five natural elements—and when they are placed in harmony, life flows smoothly. The image explains an important Vastu truth 👇 🌍 Earth (South-West) Represents stability, support, and strength. A strong South-West gives career stability, mental balance, and long-term growth. 🔥 Fire (South-East) Symbol of energy and transformation. That is why kitchen and electrical activities belong here—not in other zones. 🌊 Water (North-East) Stands for clarity, health, and prosperity. Clean, open, and light North-East supports peace and positive thinking. 🌬️ Air (North-West) Controls movement, communication, and change. Proper ventilation here improves relationships and work flow. ✨ Space (Centre – Brahmasthan) The heart of the house. Keeping it open allows energy to circulate freely across all directions. 🔑 Simple Vastu lesson: When elements are respected, life feels b...

ज्योतिष में शुक्र ग्रह

ज्योतिष में शुक्र ग्रह शुक्र को दैत्य गुरु “शुकराचार्य” कहा गया है। यह वह दिव्य ऋषि हैं जिन्हें मृत-संजीवनी विद्या का वरदान प्राप्त था – अर्थात मृत प्राणियों में पुनः जीवन डालने की कला। यही कारण है कि कुंडली में शुक्र व्यक्ति को टूटने नहीं देता, चाहे जीवन कितना भी कठिन क्यों न हो। शुक्र लक्ष्मी, सौंदर्य, वैभव, भोग, विलासिता, प्रेम, कला, संगीत, वस्त्र, सुगंध, रत्न, आकर्षण, वाहन, और विवाह सुख का कारक है। जिस कुंडली में शुक्र शुभ हो, वहाँ गरीबी लंबे समय तक टिक नहीं पाती। अब देखें – 12 भावों में शुक्र का सामान्य फल 1st भाव (लग्न में शुक्र) व्यक्ति आकर्षक व्यक्तित्व वाला, सुंदर मुख-मंडल, कला प्रेमी, अच्छे कपड़े और सुगंध का शौकीन। समाज में सम्मान और लोकप्रियता मिलती है। जीवन में प्रेम और सफलता सहज मिलती है। 2nd भाव वाणी में मिठास, परिवार में धन-वैभव, अच्छे भोजन और गहनों का सुख। बैंक बैलेंस अच्छा, व्यापार में लाभ और वाणी से काम निकलवाने की क्षमता। 3rd भाव साहसी, रचनात्मक, संगीत–नृत्य–कला में उत्कृष्ट। छोटे भाई-बहनों से प्रेम। सोशल मीडिया, प्रदर्शन कला, लेखन या विज्ञापन में सफलता। 4th भाव मां ...