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12 house in kundali

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√●●द्वादश भाव दुःख है। ★ इसलिये यह दुःस्थान है।  ★इस भाव में आया हुआ ग्रह अपने स्वरूप जन्य दुःख से जातक को प्रभावित करता है।  ★सूर्य आत्मिक क्लेश देता है।  ★चन्द्रमा मानसिक क्लेश देता है। ★ मंगल दुर्घटनाएँ करता है।  ★बुध बुद्धि को विकल करता है। ★ गुरु ज्ञान का दुरुपयोग कराता है। ★शुक्र से वीर्य व्यर्थ जाता है।  ★शनि बन्धन में डालता है ,किन्तु शत्रु का पराभव करता है।  ★राहु अकारण पीड़ा पहुंचाता है।  ★ केतु मदमत करता है।  √●द्वादश भव श्राद्ध स्थान है। जीव दिये हुए अन्न की इच्छा करते हैं, उन सबके लिये मैं यह अन्नदान करता हूँ। इससे वे परितृप्त और आनन्दित हो। अन्नाय नमः ।  जिसके पास अन्न का अभाव है, वह कैसे श्राद्ध करे ? उसके लिये यह श्लोक है...  "भूतानि सर्वाणि तथानपेतद्,  अहं च विष्णुर्न ततोऽन्यदस्ति ।   तस्मादहं   भूतनिकायभूतम्  अन्नं प्रयच्छामि भवाय तेषाम् ॥"     (विष्णु पुराण ३।११।५४) √★सम्पूर्ण प्राणी, यह अन्न और मैं सभी विष्णु हैं, क्योंकि उस (विष्णु) से भिन्न और कुछ है ही नहीं। ...

सूर्य 6वें भाव में — Karmic Debt Model

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🔷 🔮 सूर्य 6वें भाव में — Karmic Debt Model 🔮🔷 🫴“सूर्य जब 6 में जाता है, तो आत्मा खुद अपने कर्ज चुकाने मैदान में उतरती है” ✔ यह सिर्फ struggle नहीं है ✔ यह repayment cycle है, जैसे भगवान सूर्यनारायण 🌞 खुद किसी लीला के कारण बंधन में फंसे(जैसे भगवान कृष्ण चंद्र जू= ओखली में खुद को बंधवा लिया,।।।।। जैसे; भगवान श्री रामचंद्र जी ने स्वयं और लक्ष्मण जी को नागपाश में, हनुमान जी महाराज ने स्वयं को ब्रह्मपाश में बंधवा लिया)  👉===> ठीक, इसी प्रकार सूर्य जब 6 में जाता है इसका मतलब ऐसा जातक अपने आत्मा से कोई बोझ हल्का करने के लिए इस दुनियावी लीला में बैठा है, इसपर भी कहीं बृहस्पति की शुभ दृष्टि आती हो तो पक्का यह सूर्य में जरूर कुछ कल्याणकारी कार्य करने वाली प्लानिंग है। अब देखिए पंचम भाव और छठे भाव को समझें तो ✔ 5th = पूर्व जन्म का पुण्य ✔ 6th = पाप / ऋण 👇 👉 और सूर्य naturally 5th का कारक है 👉 इसलिए: “पुण्य की कमाई → पाप के कर्ज चुकाने में लगती है” इस जन्म में जो अच्छा मिलेगा, वो पुराने पापों को खत्म करने में खर्च होगा”  🧬 🔷 पिता का कर्म/ऋण भी 👉 सूर्य = father ✔ 6th में: प...

vastu

🏡✨ वास्तु शास्त्र: दिशाओं का रहस्य और आपके जीवन पर उनका प्रभाव ✨🏡 क्या आप जानते हैं कि आपके घर की दिशाएँ और उनका वास्तु आपके स्वास्थ्य, धन और सुख-शांति को गहराई से प्रभावित करते हैं? आइए जानते हैं प्रमुख दिशाओं के वास्तु दोष, उनके परिणाम और कुछ सरल बचाव के उपाय: 🌞 1. पूर्व दिशा (East) प्रतिनिधि ग्रह: सूर्य वास्तु दोष का प्रभाव: यदि पूर्व दिशा ऊँची हो या पश्चिमी दीवार से ऊँची हो, तो आर्थिक अभाव, संतान को कष्ट, पेट/यकृत रोग और घर की महिलाओं को अस्वस्थता का सामना करना पड़ सकता है। पूर्व में शौचालय होना बहुत अशुभ है। बचाव के उपाय: यहाँ पानी की टंकी या नल लगवाना शुभ है। इस भाग को नीचा और साफ़ रखें। पूर्वी दीवार पर ‘सूर्य यन्त्र’ स्थापित करें। 🪐 2. पश्चिम दिशा (West) प्रतिनिधि ग्रह: शनि वास्तु दोष का प्रभाव: यदि पश्चिम भाग नीचा हो, तो छाती, त्वचा या पेट के रोग हो सकते हैं। अकारण धन खर्च होता है। यहाँ रसोई होना पित्त या गर्मी के रोग दे सकता है। बचाव के उपाय: पश्चिम की दीवार को थोड़ा ऊँचा रखें। यहाँ अशोक का वृक्ष लगाएं और दीवार पर ‘वरुण यन्त्र’ स्थापित करें। 🟢 3. उत्तर दिशा (North) प्रतिनिध...