तीन # बिंदुओं पर चर्चा करते है
तीन # बिंदुओं पर चर्चा करते है (1) शादी में विलम्ब होना ! (2) शादी तय होकर टूटना ! (3) शादी के बाद तलाक होना ! 💐कुंडली के सप्तम भाव में बुध और शुक्र दोनों हो तो विवाह की बातें होती रहती हैं, लेकिन विवाह काफी समय के बाद होता है। 💐सप्तम भाव में शनि और गुरु हो तो शादी देर होती है 💐राहु की दशा में शादी हो या राहु सप्तम भाव के दोष बढ़ा रहा हो तो शादी होकर टूट सकती है। 💐सप्तम भाव में क्षीण चंद्र दाम्पत्य जीवन में न्यूनता उत्पन्न करता है। 💐सप्तम भाव में सूर्य, राहू शनि व मंगल की उपस्थिती या सप्तमेश का नीच या वेधा स्थान में बैठकर पापी व क्रूर ग्रह से पीड़ित होना तलाक या अलगावका कारण बनता है। 💐सातवें भाव का स्वामी और बाहरवें भाव का स्वामी अगर दसवें भाव में युति करता हो तो में तलाक होने के योग बनते है 💐 यदि जातक की कुंडली मे षष्ठेश एक अलगाववादी ग्रह हो और वह दूसरे, चतुर्थ, सप्तम व बारहवें भाव में स्थित हो तब भी अलगाव होने की संभावना बनती है.जन्म कुंडली में लग्नेश व सप्तमेश षडाष्टक अथवा द्विद्वार्दश स्थितियों में हों तब पति-पत्नी के अलग होने की संभावना बनती है. ...