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तीन # बिंदुओं पर चर्चा करते है

तीन # बिंदुओं पर चर्चा करते है (1) शादी में विलम्ब होना ! (2) शादी तय होकर टूटना ! (3) शादी के बाद तलाक होना ! 💐कुंडली के सप्तम भाव में बुध और शुक्र दोनों हो तो विवाह की बातें होती रहती हैं, लेकिन विवाह काफी समय के बाद होता है। 💐सप्तम भाव में शनि और गुरु हो तो शादी देर होती है 💐राहु की दशा में शादी हो या राहु सप्तम भाव के दोष बढ़ा रहा हो तो शादी होकर टूट सकती है। 💐सप्तम भाव में क्षीण चंद्र दाम्पत्य जीवन में न्यूनता उत्पन्न करता है। 💐सप्तम भाव में सूर्य, राहू शनि व मंगल की उपस्थिती या सप्तमेश का नीच या वेधा स्थान में बैठकर पापी व क्रूर ग्रह से पीड़ित होना तलाक या  अलगावका कारण बनता है। 💐सातवें भाव का स्वामी और बाहरवें भाव का स्वामी अगर दसवें भाव में युति करता हो तो में तलाक  होने के योग बनते है 💐  यदि जातक की कुंडली मे षष्ठेश एक अलगाववादी ग्रह हो और वह दूसरे, चतुर्थ, सप्तम व बारहवें भाव में स्थित हो तब भी अलगाव होने की संभावना बनती है.जन्म कुंडली में लग्नेश व सप्तमेश षडाष्टक अथवा द्विद्वार्दश स्थितियों में हों तब पति-पत्नी के अलग होने की संभावना बनती है. ...

झाड़ू का वास्तु एवं ज्योतिषीय आधार

झाड़ू का वास्तु एवं ज्योतिषीय आधार 〰🍂〰🍂〰🍂〰🍂〰🍂〰 पौराणिक शास्त्रों में कहा गया है कि जिस घर में झाड़ू का अपमान होता है वहां धन हानि होती है, क्योंकि झाड़ू में धन की देवी महालक्ष्मी का वास माना गया है। विद्वानों के अनुसार झाड़ू पर पैर लगने से महालक्ष्मी का अनादर होता है। झाड़ू घर का कचरा बाहर करती है और कचरे को दरिद्रता का प्रतीक माना जाता है। जिस घर में पूरी साफ-सफाई रहती है वहां धन, संपत्ति और सुख-शांति रहती है। इसके विपरित जहां गंदगी रहती है वहां दरिद्रता का वास होता है। ऐसे घरों में रहने वाले सभी सदस्यों को कई प्रकार की आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी कारण घर को पूरी तरह साफ रखने पर जोर दिया जाता है ताकि घर की दरिद्रता दूर हो सके और महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त हो सके। घर से दरिद्रता रूपी कचरे को दूर करके झाड़ू यानि महालक्ष्मी हमें धन-धान्य, सुख-संपत्ति प्रदान करती है। वास्तु विज्ञान के अनुसार झाड़ू सिर्फ घर की गंदगी को दूर नहीं करती है बल्कि दरिद्रता को भी घर से बाहर निकालकर घर में सुख समृद्घि लाती है। झाड़ू का महत्व इससे भी समझा जा सकता है कि रोगों को दूर करने वाली ...

अस्त ग्रह

 कुंडली के अस्त ग्रहो 👍जब कोई भी ग्रह  सूर्य से एक निश्चित दूरी अर्थात अंश या डिग्री पर आ जाता है तो सूर्य की प्रचंड शक्ति की किरणों अर्थात् उसके तेज और ओज के आगे अन्य ग्रह की शक्ति (प्रकाश/ज्योति) कमजोर (मंद) पड़ जाती है। ... इस स्थिति में उस ग्रह को 'अस्त' होना कहते हैं। 👍बुध सूर्य के दोनों ओर 14 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर अस्त हो जाता है। 👍बृहस्पति सूर्य के दोनों ओर 11 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर अस्त माना जाता है। 👍शुक्र सूर्य के दोनों ओर 10 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर अस्त हो जाता है ।👍 लेकिन यदि शुक्र वक्री चल रहा हो तो वह सूर्य के दोनों ओर 8 डिग्री या इससे अधिक निकट आने पर अस्त हो जाता है। 👍शनि सूर्य के दोनों ओर 15 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर अस्त हो जाता है। 💐अस्त ग्रह का प्रभाव कैसे कम करे : 👍अस्त ग्रहों को सुचारू रूप से चलने के लिए अतिरिक्त बल की आवश्यकता होती है तथा कुंडली में किसी अस्त ग्रह का स्वभाव देखने के बाद ही यह निर्णय किया जाता है कि उस अस्त ग्रह को अतिरिक्त बल कैसे प्रदान किया जा सकता है। •👍 यदि किसी कुंडली में कोई ग्रह अस्त है और...

3rd house

We all know that 3rd house of our kundali is known as prakram bhava (known for other things too, but let's focus on prakram only). Simple meaning of parakram is courage, bravery, will power, efforts, power, action etc... 9th house is popularly known as bhagya bhava, destiny, luck which is fixed by our karma. A strong and dignified 3rd house , 3rd lord and it's karaka, mars having any connection with lagna or lagna lord, determines how much will power, strength, power and action we have within ourselves to change or shape our destiny, bhagya, as any graha placed in 3rd house will have its direct aspect on 9th house.  It is said that malefics like saturn, mars, rahu, ketu or sun in 3rd house reflects challanges in begining but in the end with sheer will power, perseverance, effort and Passion to take action to shape our destiny. ultimately we  can create  our own path for ourselves. self made as people say. (Pahad Tod k apna rasta banana)  Benafic  like moon, venu...

6 house

■Significance of 6th House Fear from Enemy • Obstacles Disappointment • ill-fame • Rank and Status Enmity with subordinates  ■6th House - 6th house refers to daily work or daily mundane works include method of responding to everyday crises. Capacity to hard work, Misunderstanding with brothers and like. Service, Quarrels, volunteer works. Attitude towards career, and towards your colleagues or clients, if in business. Therefore, 6th house works basically as the 6th sense. It tells us or rather warns us about all sorts of (ill) happenings in life. ■ 6th house is 2nd from 5th house • The 5th house is the house of knowledge. Poorv Punya Karma, relates to self- expression that brings you pleasure.  ■It signifies mental intelligence, the capability to create and innovate, bring novel ideas to old concepts. • ■ Plus we all know that 2nd house represents Assets, wealth/ possessions, rapacity to communicate, and concepts of value  ■If the lord of 6th House is located in 6th or 8t...

पक्षियों द्वारा शुभाशुभ विचार

पक्षियों द्वारा शुभाशुभ विचार 〰️〰️🌼〰️🌼〰️🌼〰️〰️ पक्षी बदले आपका भाग्य  〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताओ के वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जा...

दशम भाव

जन्म कुंडली का सबसे महत्वपूर्ण भाव दशम भाव होता है। दशम भाव पिता, व्यापार, उच्च नौकरी, राजनीति, राजसुख, प्रतिष्ठा, विश्वविख्याति का कारक भाव माना जाता है। इसे कर्म भाव भी कहते हैं। जातक अपने कर्म से महान विख्यात एवं यशस्वी भी होता है और अपने पिता का नाम रोशन करने वाला भी होता है। यदि इस भाव का स्वामी बलवान होकर कहीं भी हो उस प्रकार से फल प्रदाता होता है। दशमेश का मतलब होता है दशम भाव में जो भी राशि नंबर होगा, उस भाव के स्वामी को दशमेश कहा जाएगा। यथा दशम भाव में कुंभ यानी 11 नंबर लिखे होंगे तो उसका स्वामी शनि होगा। यदि इस भाव में 5 नंबर लिखा है तो सिंह राशि होगी, यदि 12 नंबर लिखा है तो मीन राशि होगी। * लग्न का स्वामी और दशम भाव का स्वामी यदि एक साथ हों तो ऐसा जातक नौकरी में विशेष उन्नति पाता है। * दशमेश के साथ शुक्र हो और द्वादश भाव में बुध हो तो वह जातक महात्मा, पुण्यात्मा होता है, लेकिन दशमेश व शुक्र केंद्र में होना चाहिए। * दशम भाव का स्वामी केंद्र या त्रिकोण (पंचम, नवम भाव को कहते है) में हो तो वह जातक राजपत्रित अधिकारी होता है। * दशम भाव में स्वराशिस्थ सूर्य पिता से धन लाभ दिलाता ह...