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Showing posts from May, 2026

शनि देव

शनिदेव जन्मोत्सव 16 मई विशेष 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ शनि जिन्हें कर्मफलदाता माना जाता है। दंडाधिकारी कहा जाता है, न्यायप्रिय माना जाता है। जो अपनी दृष्टि से राजा को भी रंक बना सकते हैं। हिंदू धर्म में शनि देवता भी हैं और नवग्रहों में प्रमुख ग्रह भी जिन्हें ज्योतिषशास्त्र में बहुत अधिक महत्व मिला है। शनिदेव को सूर्य का पुत्र माना जाता है। मान्यता है कि ज्येष्ठ माह की अमावस्या को ही सूर्यदेव एवं छाया (संवर्णा) की संतान के रूप में शनि का जन्म हुआ। शनि पूजा (साधना) की सामान्य विधि 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ शनिदेव की पूजा करने के लिये कुछ अलग नहीं करना होता। इनकी पूजा भी अन्य देवी-देवताओं की तरह ही होती है। शनि जयंती के दिन उपवास भी रखा जाता है।  शनिदेव का जन्म दोपहर के समय हुआ था, अतः शास्त्र अनुसार शनि देव की पूजा उपासना मध्यकाल के समय ही कि जानी चाहिये। भारत में अनेक स्थानों पर उदय तिथि के (पंचांग) अनुसार के पर्व संपन्न होता हैं।  शारीरिक शुद्धि के पश्चात लकड़ी के एक पाट पर साफ-सुथरे काले रंग के कपड़े को बिछाना चाहिये। कपड़ा नया हो तो बहुत अच्छा अन्यथा साफ अवश्य होना चाहिये। फिर इस ...

ईशान कोण आकाश का द्वार है

“ईशान कोण आकाश का द्वार है…और नैऋत्य पृथ्वी का आधार। इन दोनों के संतुलन का नाम ही वास्तु है।”  वास्तुशास्त्र केवल दिशाओं का साधारण ज्ञान नहीं है, बल्कि यह पृथ्वी, ब्रह्मांड और ऊर्जा के बीच चलने वाले अदृश्य संतुलन को समझने का दिव्य विज्ञान है। जब हम किसी भवन, भूमि या घर को देखते हैं, तो वास्तव में हम केवल ईंट, पत्थर और दीवारें नहीं देख रहे होते, बल्कि एक ऐसे ऊर्जा-पात्र को देख रहे होते हैं जो ब्रह्मांडीय शक्तियों को ग्रहण भी करता है और धारण भी करता है। इसी गूढ़ सत्य को यदि एक सरल उदाहरण में समझना हो, तो एक “मटका” वास्तु का सबसे सुंदर प्रतीक बन जाता है। कल्पना कीजिए कि यह पूरी पृथ्वी एक मटके के समान है। मटके का जो निचला भाग होता है — उसकी पेंदी — वही उसका आधार, उसका भार और उसकी स्थिरता होती है। यदि यही पेंदी कमजोर हो जाए, कट जाए या उसमें छेद हो जाए, तो पूरा मटका अस्थिर हो जाता है। वास्तु में यही स्थान S/W दक्षिण-पश्चिम अर्थात नैऋत्य दिशा का है। यह दिशा पृथ्वी तत्व की दिशा मानी गई है। स्थायित्व, सुरक्षा, नियंत्रण, परिपक्वता, धन की स्थिरता, परिवार और रिश्तों की मजबूती — ये सभी बातें न...