चंद्र 6,8,12 भाव मे
🕉️ चंद्रदेव की भावुक अग्निपरीक्षा: भाव ६, ८, और १२ में चंद्रमा का गहन विश्लेषण: चंद्रमा मन, भावनाएँ, माता, और तरलता का प्रतीक है, और त्रिक भाव (६, ८, १२) चुनौतियों, परिवर्तन, और विसर्जन का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन भावों में चंद्रमा का होना व्यक्ति के मानसिक और भावनात्मक जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है। यह विश्लेषण त्रिक भावों में #चंद्रमा की स्थिति के मानसिक स्वास्थ्य, अचानक भावनात्मक परिवर्तन, और अवचेतन मन पर पड़ने वाले वैज्ञानिक, ज्योतिषीय, और मनोवैज्ञानिक प्रभावों पर आधारित है। 🕉️ षष्ठम भाव (शत्रु/रोग/ऋण) में चंद्रमा – "भावनात्मक प्रतिद्वंदिता और चिंता" छठा भाव रोग, शत्रु, ऋण, और सेवा का भाव है। यहाँ चंद्रमा की स्थिति व्यक्ति के मन को निरंतर तनाव और चिंता के माहौल में रखती है, जिससे भावनात्मक स्थिरता बनाए रखना कठिन हो जाता है। 🪔 खगोलीय-वैज्ञानिक रहस्य (Somatization & Neurotic Anxiety): 👉 मूल सिद्धांत: छठा भाव तनाव से संबंधित है। चंद्रमा यहाँ बैठकर चिंता (#Anxiety) और भय जैसी नकारात्मक भावनाओं को शारीरिक लक्षणों में परिवर्तित करने की प्रवृत्ति देता है। इसे आधुनिक मनोव...