मंगल
(४) मंगल दोष पर यह चोथी पोस्ट है
(१) उदाहरण कुन्डली पर पहली पोस्ट
👉 १. साधारण मांगलिक
--------------------------------- यह तो आप सभी लोग जानते होगे और पिछली पोस्ट में बता भी चुके हैं कि १-४-७-८-१२ भाव मे मंगल बैठे हो तो कुन्डली मांगलिक कहलाती
🌺पर साधारण मंगल या सिंगल मांगलिक क्या है
जव इन्ही भाव १-४-७-८-१२ मे मंगल हो पर सप्तम भाव सप्तमेश और मंगल किसी भी पापी ग्रह से पीड़ित ना हो तव कुन्डली सिंगल या साधरण मांगलिक कहलाती है
👉 २. डबल मांगलिक :-
------------------------------ जव इन्ही भाव १,२,४,७,८,१२ मे कर्क का मंगल हो अथवा
किसी एक पापी ग्रह से सप्तम भाव सप्तमेश या मंगल पीड़ित हो तो डबल मांगलिक कहलाती है
👉 चलो इसे उदाहरण से समझते हैं जिसके लिए नीचे उदाहरण कुन्डली कि पिक्चर लगाईं है उसमे समझाते हैं👇
👉 यह कुन्डली स्व० श्रीमती इंदिरा गांधी की पुत्रवधु की है मंगल चोथे भाव मे और द्वितीय भाव मे सिंह के शनि जो तीसरी दृष्टि मे मंगल को देख रहे है जिससे मंगल पीड़ित होने से कुन्डली डबल मांगलिक हुई है राहु की महादशा मे ठीक २९ वर्ष की आयु में २२-६-१९८० को इनके पती की मृत्यु एक हवाई दुर्घटना मे हुई
🌺ग्रहो का प्रभाव छोटा बढ़ा गरीब अमीर सभी लोगों पर बराबर पड़ता है इसका यह प्रत्यक्ष प्रमाण है
👉 अपबाद :-
----------------- अधिकांश लोगो से सुना होगा अगर गुरु या शुभ ग्रह सप्तम भाव या सप्तमेश को देख रहे हो तो यह योग भंग हो जाता है मे यहाँ उदाहरण कुन्डली मे देख कर कहरहा हूँ मंगल दोष तो मंगल दोष होता है गुरु भी यहाँ बचा नहीं पाये उदाहरण कुन्डली मे गुरु सप्तमेश शनि और मंगल दोनो को देख रहे हैं फिर भी वैधव होने से बचानी पाये २९ वर्ष की आयु मे ही पति सुख से वंचित होना पड़ता यह सब ग्रहो का प्रभाव है
अब आप कहोगे गुरु पीड़ित है और अष्टम भाव में है इसके लिए मे दूसरा उदाहरण देता हूँ अगली पोस्ट मे
👉 मे यहाँ दुबारा समझा रहा हूँ मेरे मांगलिक दोष योग सीखे लेकिन सीख कर अपनी खुद की कुन्डली पर कितायी भी ना आजमाये क्यों की आप लोगो के पास अभी अधूरा ज्ञान है इसलिए आप भयभीत हो सकते हो
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