संख योग

#शंख_योग 

जब पंचमेश  षष्ठेश एक दूसरे से केंद्र में हो तो शंख योग कहा जाता है। शंख योग में जिस जातक का जन्म होता है वह प्रतियोगिता परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करता है छठा भाव संघर्षों का है और पांचवा बौद्धिक क्षमता का। 

जब कभी भी पंचमेश और षष्ठेश परस्पर केंद्र में हो तो प्रतियोगिता के द्वारा शिक्षा प्राप्त करने का योग बनता है प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अच्छा योग है जैसे सीए आदि पंचमेश षष्ठेश यदि एक ही  ग्रह हो तो यह योग नहीं बनेगा क्योंकि एक दूसरे से केंद्र में नहीं होंगे।

#शकट_योग

जब चन्द्रमा और गुरु एक दूसरे से 6,8 हों तब शकट योग बनता है।

दुर्भाग्य शाली, अप्रसिद्ध, साधारण जीवन व्यतीत करने वाला होता है। कष्ट में रहता है भाग्य में परिश्रम करना होता है।
कोई भी ग्रह किसी से 6 या 8 में हो तो दशा अंतर्दशा में बुरे फल मिलते हैं।

यह अच्छा योग नहीं है कई अच्छे योगों को भंग कर देता है।
शकट का मतलब है बैलगाड़ी या जो इसे चलाता है। आज के समय मे ड्राइवर हो सकता है। जीवन में उन्नति धीरे होती है।

यह योग भंग हो जाता है-

▪︎यदि चन्द्र या गुरु लग्न से केन्द्र में हों।
▪︎चन्द्रमा के साथ शुक्र हो।
▪︎मंगल की दृष्टि चन्द्रमा पर हो
▪︎चन्द्रमा से3,6,7,8,12 भाव में बुध व शुक्र हों।
▪︎चन्द्रमा बुध या शुक्र की राशि में हो या बुध या शुक्र कर्क राशि में हो।

यदि शकट योग भंग हो रहा हो चन्द्र और गुरु बली हो तो शकट योग फिर बुरे परिणाम नहीं देता।

चन्द्र केन्द्र में स्वराशि का है।
सूर्य से 9वें भाव में पक्षबली है।
गुरु स्वराशि में है।
शकट योग भंग हो रहा है।
गुरु व चन्द्र भी बलि हैं।

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