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deepavali

The festive time of “Deepavali”, The Festival of Lights marks new beginnings and the triumph of good over evil, and light over darkness. The word Diwali comes from the Sanskrit word Deepavali, which means a row of lights.  It is one of the most prominent festival in India and South-East Asia. The festival falls on the darkest, new moon night of the Hindu lunar month Kartika, that happens between mid-October to mid-November. On auspicious occasion of Diwali, Lakshmi, the Goddess of wealth, fortune, luxury, and prosperity, visits each house to bless her devotees with great wealth and luxuries. The 7 Mukhi Rudraksha is blessed by the Goddess Lakshmi. It should be worn by those who are facing miseries related to body, finance and mental balance. In order to increase earnings and maintain the stability of earned wealth , 7 Mukhi Rudraksha is frequently kept in cash lockers and at places of business. Shree Yantra is one of the auspicious and powerful Yantra which is dedicated to Devi Lak...

शंख

दक्षिणावर्ती शंख ( Dakshinavarti Shell ) पूजा पद्धिति में दक्षिणावर्ती शंख का स्थान हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है क्योकि इस शंख को देवी लक्ष्मी जी का प्रति स्वरूप माना गया है, साथ यी ये धन संपदा, ऐश्वर्य और समृद्धि का भी प्रतिक है. इसका पूजन करने वाले व्यक्ति हमेशा संपन्न रहते है,उनका व्यापार सदा सफल और कामयाब रहता है. साथ ही इसमें भरकर सूर्य को जल चढ़ाएं तो नेत्रों के रोगों से भी मुक्ति मिलती है और अगर रात के समय समय इसमें जल भर कर रखा जाएँ और दिन में उसे घर में छिडका जाएँ तो घर में सुख शान्ति बढती है, सभी परेशानियाँ दूर हो जाती है. वैसे तो शंख अनेक प्रकार के होते है किन्तु उनमें से 2 खास है – दक्षिणावर्ती शंख ( Dakshinavarti Shell ) : दक्षिणावर्ती शंख दाई तरफ से खुला होता है और ये तंत्र विद्या में भी बहुत इस्तेमाल किया जाता है. साथ ही इस शंख का मुख बंद होता है इसीलिए इसे बजाया भी नहीं जा सकता और पूजा के कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है. - वामवर्ती शंख ( Vaamvarti Shell ) : जबकि वामवर्ती शंख बायीं तरफ से खुला होता है, इसका भी तंत्र विद्या में इस्तेमाल होता है किन्तु दक्षिणावर्ती से कम, अ...

The Sun-Ruled Nakshatras Soul lessons 🌻

🌞The Sun-Ruled Nakshatras Soul lessons 🌻 🤺Sun as the ruler teaches an important lesson to develop self sufficiency, independence and higher goals. The soft nature and Sattvik gunas can help these native to grow in their life path. Sun is the ruler but it gets its strength from union with Moon which gives us clear vision in life because Sun and Moon are the eyes of lord Jagganatha. ☀️🌕 This helps us to understand the importance of becoming flexible like water. Fexibility is important in life because when nature bends you would be molded and not broken. Sun says strong character should be combined with the flexibility of mind. (Moon). Sun reminds us that major problems in our lives are not due to obstacles, we are kept away from our goal by a clear path to lesser goal. 🌞Sun helps you to become aligned with your dharma and stop engaging in drama. Sun as the ruler reminds us that people living their dharma have a certain glow to them. Sun reminds you to focus on inner work as you have...

मंगल दौष भंग

मंगल दौष भंग : - यदि जन्म कुंडली के 1, 4, 7, 8, 12 भाव में मंगल हो तो वह व्यक्ति मांगलिक कहलाता है ।। मांगलिक को मांगलिक से ही शादी करनी होती है। लेकिन व्यक्ति को पता होना चाहिए कि सामने वाला व्यक्ति मांगलिक है या नही क्योंकि यह मुख्य बिंदु होते है जो मंगल दोष को कैंसल कर देते हैं तब आप मांगलिक नही कहलाएगे । ।  1 ) अगर मंगल देव मेष या वृश्चिक राशि में हो तो मंगल दौष कैंसल हो जाता है ओर यह रूचक नाम का पचंमहापुरूष योग भी वन जाता है ।  2) अगर कुंडली में मंगल की डिग्री 0, 1, 2 या 28,29,30 हो तो मंगल दोष कैंसल हो जाता है ।  3 ) अगर मंगल देव सूर्य के द्वारा अस्त हो जाएँ तो मंगल दोष कैंसल हो जाता है । 4) अगर कुंडली में मंगल देव योग कारक हो तो मंगल दोष  कैंसल हो जाता है । 5 ) अगर सप्तमेश सवयं राशि में या सप्तमेश की दृष्टि हो या गुरु  दृष्टि हो या गुरु साथ हो तो मंगल दोष कैंसल हो जाता है । 6 ) मंगल देव खुद के घर में वैठे हो तो मंगल दोष कैंसल हो जाता है ।  7) कुंडली में मंगल देव ऊच के हो मंगल दोष कैंसल हो जाता है । अगर गुण मिलान में 27 गुण से जयादा हो तो भी मंगल दौष ...

आइए जानें कालसर्प दोष के कुछ अचूक एवं चमत्कारिक उपाय-

 आइए जानें कालसर्प दोष के कुछ अचूक एवं चमत्कारिक उपाय-  〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ 🔸  कालसर्प योग हो और जीवन में लगातार गंभीर बाधा आ रही हो तब किसी विद्वान ब्राह्मण से राहु और केतु के मंत्रों का जप कराया जाना चाहिए और उनकी सलाह से राहु और केतु की वस्तुओं का दान या तुलादान करना चाहिए। 🔸  यदि रोजगार में तकलीफ आ रही है अथवा रोजगार प्राप्त नहीं हो रहा है तो पलाश के फूल गोमूत्र में डूबाकर उसको बारीक करें। फिर छाँव में रखकर  सुखाएँ। उसका चूर्ण बनाकर चंदन के पावडर में मिलाकर शिवलिंग पर त्रिपुण्ड बनाएँ। 41 दिन  दिन में नौकरी अवश्य मिलेगी। 🔸यदि पति-पत्नी या प्रेमी-प्रेमिका में क्लेश हो रहा हो, आपसी प्रेम की कमी हो रही हो तो भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या बालकृष्ण की मूर्ति जिसके सिर पर मोरपंखी मुकुट धारण हो घर में स्थापित करें एवं प्रतिदिन उनका पूजन करें एवं ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय  नम: शिवाय का यथाशक्ति जाप करे।  🔯🔯अन्य उपाय 👉 108 राहु यंत्रों को जल में प्रवाहित करें। 👉 सवा महीने जौ के दाने पक्षियों को खिलाएं। 👉 शुभ मुहूर्त में मुख्य द्वार पर अष्टध...

मित्रों सूर्य का तुला राशि मे गोचर 2022*

* मित्रों सूर्य का तुला राशि मे गोचर 2022* जगत की आत्मा भुवन भास्कर सूर्यदेव ने दिनाक 17 अक्टूबर 2022 दिन सोमवार को समय शाम 7.22 मिनट पर शुक देव की तुला राशि मे प्रवेश कर लिया है। तुला राशि मे ग्रहों के राजा सूर्यदेव 16 नवम्बर 2022 तक रहेंगे। बता दे कि *तुला राशि मे सूर्य नीच के होते है।* अत: जब कोई भी ग्रह नीच राशि मे होता है तो वह सबसे खराब फल देने वाला हो जाता है। यह गोचर तब और अधिक फलित होता है जब दशा अर्न्तदशा सूर्य की चल रही है और सूर्य जन्मकुंडली मे नीच अवस्था मे है। गोचरीय स्थिति मे देखे तो एक तो नीच के सूर्य  केतु के साथ राहु शनि से दृष्ट है । अत: यह तो तय है कि सूर्य शुभ फल देने मे असमर्थ रहेंगे। *और सबसे बड़ी बात सूर्य ग्रहण भी पड़ रहा है 25 को।* एक राहत की बात यह है कि शुक देव का गोचर 18 अक्टूबर को तुला राशि मे होगा। अत: सूर्य देव का नीच भंग होगा। परन्तु यह इस तरह से है कि बारिश मे छाता । अतः इस एक महीने सभी को सावधान रहने की आवश्यकता है। महत्वपूर्ण कार्यो को एक महीने के लिये टाल दे इस राशि मे सूर्य तीन नक्षत्रो को पार करेंगे क्रमशः चित्रा स्वाती विशाखा । मान सम्मान प्र...

इन_तरीकों_से_करें_हनुमानजी_की_सेवा, हर संकट मिटेगा और मिलेगा अपार सुख:-

#इन_तरीकों_से_करें_हनुमानजी_की_सेवा, हर संकट मिटेगा और मिलेगा अपार सुख:- कलिकाल में हनुमानजी की भक्ति ही कही गई है। हनुमानजी की निरंतर भक्त करने से भूत पिशाच, शनि और ग्रह बाधा, रोग और शोक, कोर्ट-कचहरी-जेल बंधन से मुक्ति, मारण-सम्मोहन-उच्चाटन, घटना-दुर्घटना से बचना, मंगल दोष, कर्ज से मुक्ति, बेरोजगार और तनाव या चिंता से मुक्ति मिल जाती है।   हनुमानजी सर्वशक्तिमान और सर्वोच्च देव हैं। उनकी भक्ति, पूजा या सेवा करने की कुछ शर्तें हैं। यह भक्ति, पूजा या सेवा उन्हें ही फलिफूत होती है जो इन शर्तों का पालन करता है। शर्त यह है कि किसी पराई स्त्री पर बुरी नजर ना रखें, ब्याज का धंधा ना करें, किसी का हक ना मारे और न दिल दुखाएं, ईश्वर, धर्म और देवता की आलोचना न करें या उपहास न उड़ाएं। हमेशा साफ-सुधरे और पवित्र बने रहें। झूठ बोलना और हर बात पर गाली देने की आदत छोड़ दें, मंदिर के नियमों का पालन करें और अपने दादा-दादी, नाना-नानी, माता-पिता, भाई-बहन, पत्नी और बेटी के साथ अच्छा व्यवहार रखें। तो आओ जानते हैं हनुमानजी की कृपा पाने के 10 तरीके। इसके लिए सबसे पहले आप अपने घर में हनुमानजी का एक अच्‍छा से...