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वास्तु ज्ञानामृत 🛕*

*🛕 वास्तु ज्ञानामृत 🛕* *वास्तुशास्त्र और आरोग्य* 'वास्तु' शब्द का अर्थ है-निवास करना। जिस भूमि पर मनुष्य निवास करते हैं, उसे 'वास्तु' कहा जाता है। वास्तु शास्त्र में गृह-निर्माण सम्बन्धी विविध नियमों का प्रतिपादन किया गया है। उनका पालन करने से मनुष्य को अन्य कई प्रकार के लाभों के साथ-साथ आरोग्य लाभ भी होता है। वास्तु शास्त्र के विशेषज्ञ किसी मकान को देखकर यह बता सकता है कि इसमें निवास करने वाले को क्या क्या रोग हो सकते हैं। इस लेख में संक्षिप्त रूप से ऐसी बातों का उल्लेख करने की चेष्टा की जाती है, जिनसे पाठकों को इस बात का दिग्दर्शन हो जाय कि गृह-निर्माण में किन दोषों के कारण रोगों की उत्पत्ति होना सम्भव है । १. भूमि-परीक्षा👉 भूमि के मध्य में एक हाथ लंबा, एक हाथ चौड़ा और एक हाथ गहरा गड्ढा खोदे। खोदने के बाद निकाली हुई सारी मिट्टी पुनः उसी गड्ढे में भर दे। यदि घड़ा भरने से मिट्टी शेष बच जाय तो वह उत्तम भूमि है। यदि मिट्टी गड्ढे के बराबर निकलती है तो वह मध्यम भूमि है और यदि गड्ढे से कम निकलती है तो वह अधम भूमि है।  दूसरी विधि👉 उपर्युक्त प्रकारसे गड्ढा खोदकर उसमें पानी...

प्रेरकप्रसंग

#प्रेरकप्रसंग  एक ट्रेन द्रुत गति से दौड़ रही थी। ट्रेन अंग्रेजों से भरी हुई थी। उसी ट्रेन के एक डिब्बे में अंग्रेजों के साथ एक भारतीय भी बैठा हुआ था। डिब्बा अंग्रेजों से खचाखच भरा हुआ था। वे सभी उस भारतीय का मजाक उड़ाते जा रहे थे। कोई कह रहा था, देखो कौन नमूना ट्रेन में बैठ गया, तो कोई उनकी वेश-भूषा देखकर उन्हें गंवार कहकर हँस रहा था।कोई तो इतने गुस्से में था कि ट्रेन को कोसकर चिल्ला रहा था, एक भारतीय को ट्रेन मे चढ़ने क्यों दिया ? इसे डिब्बे से उतारो। किँतु उस धोती-कुर्ता, काला कोट एवं सिर पर पगड़ी पहने शख्स पर इसका कोई प्रभाव नही पड़ा।वह शांत गम्भीर भाव लिये बैठा था, मानो किसी उधेड़-बुन मे लगा हो। ट्रेन द्रुत गति से दौड़े जा रही थी औऱ अंग्रेजों का उस भारतीय का उपहास, अपमान भी उसी गति से जारी था।किन्तु यकायक वह शख्स सीट से उठा और जोर से चिल्लाया "ट्रेन रोको"।कोई कुछ समझ पाता उसके पूर्व ही उसने ट्रेन की जंजीर खींच दी।ट्रेन रुक गईं। अब तो जैसे अंग्रेजों का गुस्सा फूट पड़ा।सभी उसको गालियां दे रहे थे।गंवार, जाहिल जितने भी शब्द शब्दकोश मे थे, बौछार कर रहे थे।किंतु वह शख्स गम्भीर मुद्रा ...

डाइवोर्स से बचने के उपाय और खास प्रयोग ...

डाइवोर्स से बचने के उपाय और खास प्रयोग ...   वैसे तो  पति पत्नी का रिश्ता  प्रेम से भरा हुआ होता है  और जीवनभर  आपस में प्रेम दिखता रहता है  पर कभी-कभी किन्हीं कारणों से ग्रह कलेश  घर में लड़ाईया और दांपत्य जीवन में तनाव  अत्यंत बढ़ जाता है  जिस कारण  यह कलह तलाक तक पहुंच जाती है .  और  एक पवित्र रिश्ता  टूटने तक की स्थिति में आ जाता है  अपने तलाक को बचाने के लिए  महिलाएं  एवं पुरुष  कई उपाय करते हैं  और फिर से प्रेम स्थापित करने के लिए  कई  टोटके  अपनाते हैं  जिनके उपयोग से  घर में शांति पुनः स्थापित हो जाती है | तलाक होने के योग- दंपति जीवन में कभी-कभी गृह कलह कुंडली के गुणों के कारण भी प्रारंभ हो जाते हैं और बात तलाक तक आ जाती है इससे बचने के लिए शादी से पूर्व लड़की और लड़के के गुण को अवश्य मिला लेना चाहिए । १- यदि कुंडली में  गुरु में शुक्र की दशा चल रही हो  यह शुक्र में गुरु की दशा चल रही हो तो परस्पर  कलह  होना तय है  और इस लड़ाई का अंत...

अष्टमेश द्वितीय भाव में ।

अष्टमेश द्वितीय भाव में । अष्टमेश द्वितीय भाव में है तो यह निर्भर करता है की अष्टमेश लग्न कुंडली में शुभ कारक है या अशुभ कारक । शुभ कारक होकर शुभ स्थिति में होगा तो फल भी शुभ मिलेंगे । अगर अशुभ कारक होकर अशुभ स्थिति में होगा तो फल भी अशुभ रहेंगे । यह सभी चीजें कुंडली की गहन जांच के बाद समझी जा सकती हैं। द्वितीय भाव धन से संबंधित होता है।  अष्टम भाव हानि या नाश से संबंधित होता है।  सामान्य परिस्थिति में अष्टम भाव का स्वामी द्वितीय भाव में धन के लिए उत्तम नहीं है।  फाइनेंशियल क्राइसिस से परेशान रह सकता है।  धन हानि की भी संभावना होती है।  अपने धन या संपत्ति से उचित लाभ नहीं कमा पाता है। शत्रुओं या छुपे हुए शत्रु के कारण परेशानियों का सामना करता है।  चोरों के द्वारा भी हानि की संभावना  है।  अपने पारिवारिक धन को भी प्राप्त करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।  यदि अष्टम भाव का स्वामी द्वितीय भाव में शुभ स्थिति में हो तब छुपे हुए स्त्रोतों से धन लाभ होने की संभावना  है।  अचानक से भी धन लाभ हो सकता है।  अनैतिक या गैरकानूनी कार...

भडली नवमी 27 जून विशेष〰️〰️🌼〰️🌼〰️🌼〰️〰️

भडली नवमी 27 जून विशेष 〰️〰️🌼〰️🌼〰️🌼〰️〰️ हिंदू धर्म हमेशा से ही त्यौहारों, व्रत और विभिन्न प्रकार के पर्वों के लिये जाना जाता है। एक ऐसी ही महत्वपूर्ण तिथि को भडली नवमी के नाम से जाना जाता है। इस तिथि को आमतौर पर हिंदू समुदाय में विवाह के लिये शुभ दिनों के अंतिम दिन को माना जाता है। क्या है भडली नवमी 〰️〰️〰️〰️〰️〰️ आषाढ़ शुक्ल नवमी तिथि भडली नवमी जिसे आम बोलचाल की भाषा में भडल्या नवमी के नाम से जाना जाता हैं। सरल शब्दों में कहे तो इस दिन के बाद भगवान निंद्रा की अवस्था में चले जाते हैं। भडली नवमी भगवान विष्णु जी के निंद्रा की अवस्था ग्रहण करने से पहले का दिन मानी जाती है। और फिर इसके बाद विवाह की तिथि नहीं रखी जाती हैं क्योंकि भगवान का आशीर्वाद नहीं मिल पाता है। और इसलिए सभी भक्त इस विशेष दिन को बहुत ही अनोखे तरीके से मनाते है और ईश्वर का आशीर्वीद लेते है। भडली नवमी को अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे आश्रम शुक्ल पक्ष, भटली नवमी, कंदर्प नवमी, भदरिया नवमी एवं बदरिया नवमी नामो से भी जाना जाता है।। भडली नवमी को आषाढ महीने के दौरान मानाया जाता है।  यह त्योहार भगवान विष्णु से सीधे तौर पर...

एक।पिता कहानी

*एक पिता ने अपने गुस्सैल बेटे से तंग आकर उसे कीलों से भरा एक थैला देते हुए कहा ,"तुम्हें जितनी बार क्रोध आए तुम थैले से एक कील निकाल कर बाड़े में ठोंक देना !"* बेटे को अगले दिन जैसे ही क्रोध आया उसने एक कील बाड़े की दीवार पर ठोंक दी। यह प्रक्रिया वह लगातार करता रहा। धीरे धीरे उसकी समझ में आने लगा कि कील ठोंकने की व्यर्थ मेहनत करने से अच्छा तो अपने क्रोध पर नियंत्रण करना है और क्रमशः कील ठोंकने की उसकी संख्या कम होती गई। एक दिन ऐसा भी आया कि बेटे ने दिन में एक भी कील नहीं ठोंकी। उसने खुशी खुशी यह बात अपने पिता को बताई। वे बहुत प्रसन्न हुए और कहा, "जिस दिन तुम्हें लगे कि तुम एक बार भी क्रोधित नहीं हुए, ठोंकी हुई कीलों में से एक कील निकाल लेना।" बेटा ऐसा ही करने लगा। एक दिन ऐसा भी आया कि बाड़े में एक भी कील नहीं बची। उसने खुशी खुशी यह बात अपने पिता को बताई। *पिता उस लड़के को बाड़े* *में लेकर गए और कीलों के छेद* *दिखाते हुए पूछा, "क्या तुम ये छेद भर सकते हो?"* बेटे ने कहा,"नहीं पिताजी!" पिता ने उसके कन्धे पर हाथ रखते हुए कहा,"अब समझे बेटा, क्रोध में ...

कुबेराक्षी सिद्ध पौधा घर

पौधा एक लाभ अनेक   ||वास्तु निवारण||    कुबेराक्षी सिद्ध पौधा घर एवं व्यापार स्थल के वास्तु दोषो को प्रभावहीन कर भारी भरकम खर्चो के निवारण में सहायक है।   ||व्यापार वृद्धी||   कुबेराक्षी पौधा लगे होने पर व्यापारिक अवसरों एवं सकल धन में प्रत्याशित लाभ देखा जाता  है।    ||धन समृद्धि ||   धन से संबंधी बाधायें दूर होकर धन के नए मार्ग प्रशश्त होते है एवं लक्ष्मी स्थाई रूप से निवास करती है।   ||सकारात्मक ऊर्जा||   ये पौधा कुबेर का प्रतिक है। जो की नकारात्मक उर्जाओ को दूर कर सकारात्मक उर्जाओ के प्रवाह को बढ़ाने में सहायक है। जिसके अनगिनत लाभ है।   ||गृह शांति||   सकारात्मक उर्जाओ का प्रवाह गृह कलेश, आपसी मनमुटाव एवं व्यर्थ तनाव को दूर करता है। इसके अलावा उच्च कार्य दक्षता प्रदान करता है।