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बुध ग्रह

अष्टम भाव गुप्त चीजों का occult, का आयु, का बदलाव का, मृत्यु का और पुनर्जन्म का, ससुराल का, पत्नी के धन का है। यहां जातक का फोकस पूरा जीवन अष्टम भाव से संबंधित मामलों मैं गुप्त विद्याओं में रहस्यमयी घटनाओं में अचानक घटित होने वाली घटनाएं और जीवन की डार्कर साइड पर रहता है। यह भी हो सकता है कि व्यक्ति किसी की सहायता इस तरह की स्थितियों में करें अष्टम भाव दूसरों की सेवा का भी है पैतृक संपत्ति का भी है और जमीन से नीचे निकलने वाली वस्तुओं का भी है जैसे ऑयल, गैस, gems पूरा जीवन अचानक घटित होने वाली घटनाएं और छुपी हुई चीजों के चारों तरफ चलता है। अष्टम भाव मुख्य रूप से आयु का है अत: लग्नेश अपनी स्थिति के अनुसार व्यक्ति की आयु पर सीधा प्रभाव डालता है। अगर अच्छी स्थिति में है तो लंबी आयु देता है अगर कमजोर या पीड़ित है तो मध्यम या अल्पायु देता है। अष्टम भाव असाध्य बीमारी का है अगर लग्नेश अष्टम भाव में मजबूत है तब जातक की जीवन शक्ति मजबूत होगी और कोई असाध्य बीमारी नहीं होगी लेकिन यदि लग्नेश पीड़ित है तो कोई असाध्य बीमारी हो सकती है। जीवन में बाधाओं का सामना करना पड़ता है अतः लग्नेश कमजोर नहीं...

कुंडली

💥 जो सदस्य कभी भी कुंडली पोस्ट करके प्रश्न पूछना चाहते हैं  इस पोस्ट को अपने प्रोफाइल में सेव करके रखें ताकि जब उपाय बताया जाए तो आपको ढूंढना ना पड़े।  कुछ समय बाद यह मत पूछना किस ग्रह का क्या मंत्र है ? प्रबल कैसे करें ? दान उपाय क्या करना है ? ♦️ज्योतिष में सिर्फ दो ही उपाय होते हैं ।  जो ग्रह आपको फलादेश के हिसाब से लाभ दे रहे हैं यदि वह कमजोर है तो उन्हें प्रबल करें ।  जो ग्रह आपको फलादेश के हिसाब से परेशान कर रहे हैं उनका दान एवं उपाय उन ग्रहों से संबंधित जीव-जंतुओं के लिए करें ।  👉 प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में विधि विधान से साधना अवश्य करना चाहिए । कुछ महत्वपूर्ण मंत्र है जिनका जाप  प्रत्येक व्यक्ति को बचपन से  करना चाहिए । जिसके माध्यम से आप कई सारे कष्टों से छुटकारा पा सकते हैं । 👉 किसी भी ग्रह का मंत्र जाप तभी लाभ देगा जब आप  विधि विधान से साधना करेंगे और उसके बाद ज्यादा से ज्यादा संख्या में मंत्र जाप करें । एक दो माला मंत्र जाप करने से कुछ होने वाला नहीं है । परंतु आप एक दो माला से प्रारंभ करें और और धीरे-धीरे बढ़ाएं एवं अनुष्ठान...

रिक्षा वाला

🔆 रिक्शे वाला 🔆 〰️〰️🔸🔸〰️〰️  एक बार एक अमीर आदमी कहीं जा रहा होता है तो उसकी कार ख़राब हो जाती है। उसका कहीं पहुँचना बहुत जरुरी होता है। उसको दूर एक पेड़ के नीचे एक रिक्शा दिखाई देता है। वो उस रिक्शा वाले पास जाता है। वहा जाकर देखता है कि रिक्शा वाले ने अपने पैर हैंडल के ऊपर रखे होते है। पीठ उसकी अपनी सीट पर होती है और सिर जहा सवारी बैठती है उस सीट पर होती है ।  और वो मज़े से लेट कर गाना गुन-गुना रहा होता है। वो अमीर व्यक्ति रिक्शा वाले को ऐसे बैठे हुए देख कर बहुत हैरान होता है कि एक व्यक्ति ऐसे बेआराम जगह में कैसे रह सकता है, कैसे खुश रह सकता है। कैसे गुन-गुना सकता है।   वो उसको चलने के लिए बोलता है। रिक्शा वाला झट से उठता है और उसे 20 रूपए देने के लिए बोलता है।   रास्ते में वो रिक्शा वाला वही गाना गुन-गुनाते हुए मज़े से रिक्शा खींचता है। वो अमीर व्यक्ति एक बार फिर हैरान कि एक व्यक्ति 20 रूपए लेकर इतना खुश कैसे हो सकता है। इतने मज़े से कैसे गुन-गुना सकता है। वो थोडा इर्ष्यापूर्ण  हो जाता है और रिक्शा वाले को समझने के लिए उसको अपने बंगले में रात को खाने के लि...

चाण्डाल योग

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 यदि जातक की कुंडली में है चाण्डाल योग, तो जातक को लगती है नाकामी हाथ, जानें उपाय 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 ज्योतिष शास्त्र में गुरु चंडाल योग को बहुत ही अशुभ योग बताया गया है। अगर कुंडली में यह योग हो तो मनुष्य को हर क्षेत्र में नाकामी हाथ लगती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में अशुभ योग का निर्माण होता है तो उसके जीवन से सुख शांति का नाश हो जाता है। जॉब और व्यापार में परेशानी बनी रहती है। करीबी लोगों से संबंध खराब हो जाते है और व्यक्ति को भटकना पड़ता है यदि कुंडली में शुभफल की संख्या अधिक है तो साधारण परिस्थितियों में भी जन्म लेने वाला व्यक्ति भी धनी, सुखी और पराक्रमी बनता है, लेकिन यदि अशुभ योग प्रबल हैं तो व्यक्ति लाख प्रयास के बाद भी परेशानियों से घिरा रहता है। वैसे तो ज्योतिष शास्त्र में कई प्रकार के शुभ और अशुभ योगों का वर्णन है, लेकिन हम आज बात करने जा रहे हैं गुरु चाण्डाल योग के बारें में। जिसको सुनकर जातक के मन में भय और चिंता पैदा हो जाती है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है।  आज हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताएंगे जिनको करन...

नक्षत्र

पीपल द्वारा नवग्रह दोष दूर करने के उपाय वैदिक दृष्टिकोण से 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ भारतीय संस्कृतिमें पीपल देववृक्ष है, इसके सात्विक प्रभाव के स्पर्श से अन्त: चेतना  पुलकित और प्रफुल्लित होती है।स्कन्द पुराणमें वर्णित है कि अश्वत्थ (पीपल) के मूल  में विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में श्रीहरि और फलों में सभी देवताओं  के साथ अच्युत सदैव निवास करते हैं।पीपल भगवान विष्णु का जीवन्त और पूर्णत: मूर्तिमान स्वरूप है। भगवानकृष्णकहते हैं- समस्त वृक्षों में मैं पीपल का वृक्ष हूँ। स्वयं भगवान ने उससे अपनी उपमा देकर पीपल के देवत्व और दिव्यत्व को व्यक्त  किया है। शास्त्रों में वर्णित है कि पीपल की सविधि पूजा-अर्चना करने से सम्पूर्ण देवता  स्वयं ही पूजित हो जाते हैं।पीपल का वृक्ष लगाने वाले की वंश परम्परा कभी विनष्ट  नहीं होती। पीपल की सेवा करने वाले सद्गति प्राप्त करते हैं। अश्वत्थ सुमहाभागसुभग प्रियदर्शन।  इष्टकामांश्चमेदेहिशत्रुभ्यस्तुपराभवम्॥  प्रत्येक नक्षत्र वाले दिन भी इसका विशिष्ट गुण भिन्नता लिए हुए होता है। भारतीय ज्योतिष शा...

पितृदोष

#पितृदोष कलयुग में लोगो को बहुत बुरी तरीके से मारता है। लोग समझ ही नही पाते है।जब तक उनकी आंख खुलती है तब तक पितृदोष उनकी जिंदगी को तहस नहस कर चुका होता है। पितृदोष कभी भी पूरे घर परिवार को अपनी चपेट में लेता है।इसका प्रभाव घर के सभी सदस्यों के ऊपर पड़ता है और पितृदोष के प्रभाव के कारण पूरा घर बुरी तरीके से प्रभावित होता है। जीवन में कोई भी उपाय काम न करे तो समझ लेना चाहिए की जिंदगी अब पितृदोष से घिर चुकी है। इसलिए पितृदोष को ठीक करने के लिए सबसे पहले घर का इलाज करना जरूरी होता है।जब तक घर का इलाज नहीं किया जाता है तब तक आप चाहे कितने भी उपाय कर लीजिए पितृदोष अपना दुष्प्रभाव नहीं छोड़ता है। घर का इलाज वास्तु उपायों से करना होता है,जब तक घर की वास्तु व्यवस्था न बिगड़े तब तक पितृदोष अपना कोई विशेष दुष्प्रभाव घर में नही डाल पाता है। अगर अपने घर की व्यवस्था को वास्तु से मजबूत किया जाए तो पितृदोष निष्क्रिय हो जाता है और अपना प्रभाव नहीं दे पाता है। इसलिए हमारे शास्त्रों में वास्तु का बहुत अधिक महत्व बताया गया है। घर का वास्तु जितना मजबूत होगा,घर की किलाबंदी उतनी ही पावरफुल रहेगी। याद रखिए प...

सरकारी नोकरी

सरकारी जॉब योग- 1. जन्म-कुंडली में दशम स्थान- जन्म-कुंडली में दशम स्थानको (दसवां स्थान) को तथा छठे भाव को जॉब आदि के लिए जाना जाता है। सरकारी नौकरी के योग को देखने के लिए इसी घर का आकलन किया जाता है। दशम स्थान में अगर सूर्य, मंगल या ब्रहस्पति की दृष्टि पड़ रही होती है साथ ही उन का सम्बन्ध छठे भाव से हो तो सरकारी नौकरी का प्रबल योग बन जाता है। कभी-कभी यह भी देखने में आता है कि जातक की कुंडली में दशम में तो यह ग्रह होते हैं लेकिन फिर भी जातक को संघर्ष करना पड़ रहा होता है तो ऐसे में अगर सूर्य, मंगल या ब्रहस्पति पर किसी पाप ग्रह (अशुभ ग्रह) की दृष्टि पड़ रही होती है तब जातक को सरकारी नौकरी प्राप्ति में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अतः यह जरूरी है कि आपके यह ग्रह पाप ग्रहों से बचे हुए रहें। 2. जन्म कुंडली में जातक का लग्न- जन्म कुंडली में यदि जातक का लग्न मेष, मिथुन, सिंह, वृश्चिक, वृष या तुला है तो ऐसे में शनि ग्रह और गुरु (वृहस्पति) का एक-दूसरे से केंद्र या त्रिकोण में होना, सरकारी नौकरी के लिए अच्छा योग उत्पन्न करते हैं। 3. जन्म कुंडली में यदि केंद्र में अगर चन्द्रमा, ब्रहस्पति...