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स्पोर्ट्स में सफलता के कुछ विशेष योग –

स्पोर्ट्स में सफलता के कुछ विशेष योग – 👌  मंगल बलि होकर कुंडली के दशम भाव में बैठा हो या दशम भाव पर मंगल की दृष्टि हो तो स्पोर्ट्स में सफलता मिलती है। 👌  मंगल स्व या उच्च राशि (मेष, वृश्चिक, मकर) में होकर केंद्र(1,4,7,10) त्रिकोण(1,5,9) आदि शुभ भाव में बैठा हो तो तो स्पोर्ट्स में अच्छी सफलता दिलाता है। 👌 मंगल , शनि से पांचवे या नौवें भाव में बलि होकर बैठा हो तो भी स्पोर्ट्स में सफलता मिलती है। 👌 तीसरे भाव के स्वामी का तीसरे भाव में ही बैठना या तीसरे भाव को देखना भी स्पोर्ट्स में जाने के लिए सहायक होता है। 👌 षष्टेश का छटे भाव में बैठना या छटे भाव को देखना भी एक खिलाडी के लिए सहायक होता है। 👌 कुंडली के तीसरे भाव में क्रूर ग्रहों ( राहु, केतु, शनि, मंगल, सूर्य) का होना एक खिलाडी का प्रक्रम बढ़ा कर उसे प्रतिस्पर्धा में आगे रखता है। 👌 यदि तृतीयेश दसवें भाव में हो और मंगल ठीक स्थिति में हो तो भी खेलों में सफलता मिलती है। 👌 पंचमहापुरुष योगों में से “रूचक–योग” का कुंडली में  बनना स्पोर्ट्स में सफलता दिलाता है। विशेष – तो यहाँ हमने देखा के खेलों में सफलता या अच्छा करियर बना...

Dusthana Bhava 🔆

🔆 Dusthana Bhava 🔆 6,8,12 House  Shows Difficulty in Life Planets in 6th House : Is Your high way of dealing Challenges. For Example : Saturn in 6th house, your hard work & determination to get the things done. Planets in 8th House : Is your Dark Side which needs change to overcome the obstacles. For Example : Venus in 8th house, your higher expectations frm your partner is  really a drawback, which needs change. Planets in 12th House : Is your plus point which is taken advantage of ? For Example : Mercury in 12th House, others dnt take you or your words seriously. Note : It's a simple exercise, kindly relate & experience the result. Always pay attention to transitory planet's on these Bhava', you will understand your strength & weakness in more subtle way.

108" का रहस्य 〰️〰️🌼〰️〰️

"108" का रहस्य  〰️〰️🌼〰️〰️ ॥ॐ॥ का जप करते समय 108 प्रकार की विशेष भेदक ध्वनी तरंगे उत्पन्न होती है जो किसी भी प्रकार के शारीरिक व मानसिक घातक रोगों के कारण का समूल विनाश व शारीरिक व मानसिक विकास का मूल कारण है। बौद्धिक विकास व स्मरण शक्ति के विकास में अत्यन्त प्रबल कारण है।  ॥ 108 ॥ यह अद्भुत व चमत्कारी अंक बहुत समय काल से हमारे ऋषि -मुनियों के नाम के साथ प्रयोग होता रहा है।   ★ संख्या 108 का रहस्य ★ 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ अ→1 ... आ→2 ... इ→3 ... ई→4 ... उ→5 ... ऊ→6. ... ए→7 ... ऐ→8 ओ→9 ... औ→10 ... ऋ→11 ... लृ→12 अं→13 ... अ:→14.. ऋॄ →15... लॄ →16 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ क→1 ... ख→2 ... ग→3 ... घ→4 ... ङ→5 ... च→6 ... छ→7 ... ज→8 ... झ→9 ... ञ→10 ... ट→11 ... ठ→12 ... ड→13 ... ढ→14 ... ण→15... त→16...थ→17 ... द→18 ... ध→19 ... न→20 ... प→21 ... फ→22 ... ब→23 ... भ→24 ... म→25 ... य→26 ... र→27 ... ल→28 ... व→29 ... श→30 ... ष→31 ... स→32 ... ह→33 ... क्ष→34 ... त्र→35 ... ज्ञ→36 ... ड़ ... ढ़ ...  --~~~ओ अहं = ब्रह्म ~~~-- ब्रह्म = ब+र+ह+म =23+27+33+25=108 ~~~~~~~~~~~...

मंत्र-विधियाँ क्यों नहीं करते हैं काम? 〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️

मंत्र-विधियाँ क्यों नहीं करते हैं काम?  〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️ आपने अक्सर सत्संग में सुना होगा, रामायण, महाभारत या वेदों आदि में पढ़ा होगा कि प्राचीन काल में तपस्वी लोग मंत्रों की शक्ति से जो चाहे हासिल कर लेते थे। वे जिस चीज का आह्वान करते थे, उसे तुरंत पा लेते थे। आज भी आप जब शारीरिक या आर्थिक रूप से परेशान होते हैं, और किसी ज्योतिषी के पास जाते हैं, तो वह क्या करता है। जन्म पत्रिका देखने के बाद पीड़ित ग्रह की शांति के लिए कुछ उपाय बता देता है और कुछ मंत्रों का जाप करने के लिए कहता है। ऐसे में कई बार लोग सवाल करते हैं कि उन्होंने मंत्रों का जाप तो किया, लेकिन कोई खास सफलता नहीं मिली। आखिर ऐसा क्यों होता है कि जो मंत्र प्राचीन काल में सिद्ध थे, उनका प्रभाव आज कम दिखता है या नहीं दिखता है। मंत्रों की शक्ति प्रभावी क्यों नहीं होती है। आज हम आपको इसका सबसे बड़ा राज बताने जा रहे हैं कि मंत्रों की शक्ति आखिर काम कैसे करती है। दरअसल, आज लोग मंत्रों को जाप करते समय सिर्फ मुंह से बोलते रहते हैं। उसमें उनका मन और आत्मा नहीं शामिल होती है। मंत्र पढ़ते या जपते समय आधा ध्यान घर के काम में लगा...

ચંદ્ર રાશિ અનુસાર તમારે ભગવાન શિવને કેવી રીતે મનાવવા

*મહાશિવરાત્રિ 1 માર્ચના રોજ છે. આ દિવસે ભગવાન શિવની આરાધના કરવાથી ભક્તોના તમામ પાપ તથા સંકટ દૂર થઈ જાય છે. આ દિવસે આ* વ્યક્તિઓ પોતાની રાશિ અનુસાર શિવ આરાધના કરે તો ઉત્તમ પરિણામ મળે છે. પોતાની ચંદ્ર રાશિ અનુસાર તમારે ભગવાન શિવને કેવી રીતે મનાવવા, તે વિશે વાત કરીશું. મેષઃ 12 જ્યોર્તિલિંગમાંથી સોમનાથ પહેલું જ્યોર્તિલિંગ છે, જેનો જન્મ મેષ રાશિમાં છે. શિવરાત્રિના દિવસે સોમનાથ જ્યોર્તિલિંગની પૂજા કરવી. જે જાતકો સોમનાથ ના જઈ શકે તેઓ નજીકના શિવ મંદિરમાં જઈને સોમનાથનું ધ્યાન કરીને શિવને દૂધથી સ્નાન કરાવે અને પછી શિવજીને ખિજડાના ઝાડનું ફૂળ તથા પત્તાઓ ચઢાવવા. શિવની પૂજા પછી ‘ह्रीं ॐ नमः शिवाय ह्रीं’નો જાપ કરવો. વૃષભઃ શૈલ પર્વત પર સ્થિત મલ્લિકાર્જુન વૃષભ રાશિના સ્વામી છએ. આ જાતકોએ મલ્લિકાર્જુનના દર્શન કરવા જોઈએ પરંતુ જે લોકો ત્યાં જઈના શકે તો તેમણે કોઈ પણ શિવલિંગની પૂજા ગંગાજળથી કરવી અને આંકડાનું ફૂલ ચઢાવવું. મલ્લિકાર્જુનનું ધ્યાન ધરીને ‘ॐ नमः शिवाय’ મંત્રનો જાપ કરવો. મિથુનઃ ઉજ્જૈન સ્થિત મહાકાલેશ્વર જ્યોર્તિલિંગ મિથુન રાશિના સ્વામી છે. મહાકાલેશ્વર કાળના પણ કાળ છે. આમની પૂજા કરવાથી અકાળ મૃત્યુનો ભય...

लेख पढ़ें और यह प्रयोग करें।

लेख पढ़ें और यह प्रयोग करें। मान्यता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शंकर के आंसुओं से हुई है ।रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति पर भगवान शिव की कृपा बनी रहती है ।इससे व्यक्ति सारे संकटों से बचा  रहता है और उसकी मनोकामनाएं भी पूरी होती है ।रुद्राक्ष को विज्ञान में भी बहुत असर कारक माना गया है। : आओ अभी आजमाएं और तुरंत रिजल्ट पाएं- सबसे प्रथम तो मुझे यह कहना है कि इसी शिवरात्रि में एक अच्छा और असली रुद्राक्ष जरूर धारण करें, अपनी कुंडली अनुसार। : लेकिन पहले रुद्राक्ष की ताकत को खुद परख लें। दो बर्तनों में पानी लीजिए एक में बहुत स्वच्छ और सात्विक पानी या किसी तीर्थ का जल तथा एक बर्तन में गंदा पानी या केमिकल वाला पानी या फिर थोड़ा सा जहर मिला पानी। : अब एक धागे में रुद्राक्ष को लटका कर उस पानी के ऊपर लेकर आए, बारी बारी से, स्वच्छ जल पर रुद्राक्ष शांत रहेगा या घड़ी की दिशा में घूमेगा तथा जहरिले पानी में घड़ी की उलटी दिशा में : दूसरा प्रयोग- किसी खराब भूमि या जिस घर का वास्तु बहुत खराब हो उसी तरीके से रुद्राक्ष को भूमि के नजदीक लेकर आएं रुद्राक्ष धीरे-धीरे हल्का-हल्का उलटी दिशा में घूमना ...

आपकी #कुंडली और #राजयोग-

आपकी #कुंडली और #राजयोग-    =================== #सूर्य से बनने वाले #योग- ------------------------------ १- सुर्य + गुरु --- कलत्र धनयोग २- सुर्य + मंगल --- किम्बहुना राजयोग ३- सुर्य + चंद्र --- यामिनी नाथ योग ४- सुर्य + शुक्र --- माल्वय योग ५-सूर्य + मंगल --- पराक्रम भंग योग ६- सुर्य + शनि --- विवाह भंग योग , पितृ दोष 7- सूर्य + राहु या केतु --- ग्रहण योग  #चंद्र से बनने वाले #योग- ------------------------------ १- चंद्र + मंगल --- लक्ष्मी योग २- चंद्र + शनि --- विष योग ३- चंद्र + बुध --- विपरीत राजयोग ४- चंद्र + शुक्र --- लक्ष्मी योग ५-चंद्र + राहु व केतु --- ग्रहण योग   #मंगल से बनने वाले #योग- ------------------------------- १- मंगल + शनि --- शश योग २- मंगल + गुरु --- राजमुल धनयोग ३- मंगल + शुक्र --- माल्वय योग ४- मंगल + बुध --- संतान हीन योग ५- मंगल + राहु --- द्विभार्या योग ६- मंगल + केतु --- दुर्घटना योग  #बुध से बनने वाले #योग- ------------------------------ १- बुध + गुरु --- नीचभंग राजयोग २- बुध + सुर्य --- बुधादित्य योग ३-  बुध + केतु --- शल्...